नॊमी तिथ मधु मास पुनीता।
सुकल पक्श अभिजित हरि प्रीता
मध्य दिवस अति शीत न घामा
पावन काल लोक विश्रामा।
Wednesday, December 2, 2009
हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता, कहि सुनहि बहु विध सब सन्ता। सिता राम चरित अति पावन, मधुर सरस अरु अति मन भावन। पुनि - पुनि कितनेहु सुने सुनाये, हिय कि प्यास बुझत न बुझाए। राम सिया-राम, सिया-राम, सिया-राम जै जै राम।
बून्द अघा सहहि गिरि कैसे, खल के वचन संत सहे जैसे।
राम सिया-राम, सिया-राम, सिया-राम जै जै राम।
तुलसी अपने राम को रीझ भजो कै खीज उलटो, सऊधो ऊगि है खेत परे जो बीज
उल्टा नाम जपा जग जाना, बालमीकि भये ब्रम्ह समाना।
राम सिया-राम, सिया-राम, सिया-राम जै जै राम।
होइ है सोइ जो राम रचि राखा, को करि तरक बडा वै साखा।
राम सिया-राम, सिया-राम, सिया-राम जै जै राम।
राम नाम करि अमित प्रभावा वेद पुरान उपनिशद गावा।
राम सिया-राम, सिया-राम, सिया-राम जै जै राम।
Saturday, November 28, 2009
केस पके, तन प्रान थके।
अब राग अनुराग को भार उतारो।
मोह महा मदपान कियो।
अब आतम ग्यान को अम्रित ढारो।
जीवन के अंतिम अध्याय मे
त्याग करो और दिक्षा धारो।
राम को सौंप के राज और पाठ
करओ तप आपनो जन्म सुधारॊ।
King Dashrath, after discussing with hrishi Vashishth and hrishi Vishwamitri, thinks of making shri Ram the new King.